Ghazal by Mahesh Chandra Rastogi
बताते हैं ये इशारे पता नहीं चलता
हादिसे होने वाले पता नहीं चलता।
ज़िस्म तिरने लगें पानी पे बाद मरने के
खोखले ज़िस्म आते हैं पता नहीं चलता ।
बोल दो प्यार के कहकर खड़े खड़े पल में
कब वो दिल को चुराते हैं पता नहीं चलता ।
खैरख्वाह थे हमारे वो कभी सदी गुजरी
लोग क्यूँ मन घटाते हैं पता नहीं चलता ।
जिन्दगी है अभी बाकी तु मिल सनम आके
रूह , कब जिस्म छुड़ाते हैं पता नहीं चलता ।
आस खोने चला रुक देख छँट रही स्याही
हौसले ही जिताते हैं पता नहीं चलता ।
क्या बड़ी बात है मिल जाये यार 'चन्द्र' फिर
दिल दिलों को मिलाते हैं पता नहीं चलता ।
-----द्वारा महेश चन्द्र रस्तोगी
२६/१०/२०२०
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