POEMS

Tuesday, March 8, 2011

उनकी बात

क्या बात है उनकी कि कही जाती नहीं
तो चलो फिर आज अपनी ही बातें करें
मेरा ख्याल, है जुदा उनके हर ख्याल से
फिर क्यों रह रह कर उनकी ही बाते करें
उनकी बातों में खनक है मेरी खामोशी से
है फ़िक्र, न कहीं खामोशी की बातें करें
बरसें ये बादल, बात कुछ ठहर पाती नाहीं
भीगें, कुछ इस तरह बारिश की बातें करें।
महेश चन्द्र रस्तोगी