क्या बात है उनकी कि कही जाती नहीं
तो चलो फिर आज अपनी ही बातें करें
मेरा ख्याल, है जुदा उनके हर ख्याल से
फिर क्यों रह रह कर उनकी ही बाते करें
उनकी बातों में खनक है मेरी खामोशी से
है फ़िक्र, न कहीं खामोशी की बातें करें
बरसें ये बादल, बात कुछ ठहर पाती नाहीं
भीगें, कुछ इस तरह बारिश की बातें करें।
महेश चन्द्र रस्तोगी
Tuesday, March 8, 2011
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