इश्क़ नश्शा ए चरस हो जैसे
तेरा दीदार हवस हो जैसे।।१
हुस्न ऑंखों की हवस हो जैसे
वस्ल नश्शा ए चरस हो जैसे ।।१
उठ के मय्यत से खड़ा हो जाए
ज़िक्र ए यार इतना सरस हो जैसे।।२
साठ होते ही रिटायर करना
ज़िन्दगी साठ बरस हो जैसे।।३
इक परिन्दा वो क़फ़स आरा है
ख़ातिर-ए-ज़ीस्त नफ़स हो जैसे।।४
रौब ताकत का दिखाते हो हमें
एक बेबस पे ही बस हो जैसे ।।५
जुल्म ढा ढा के जताना ऐसा
उसको आता भी तरस हो जैसे ।।६
दायरा 'चन्द्र' मु'अय्यन है तेरा
आस्मां तेरा क़फ़स हो जैसे।।७
___चन्द्र