POEMS

Wednesday, February 28, 2024

Chandr's Gazals

यूॅं तो कहने को था कुछ और भी उम्द: तुझ पर
पर हुआ यूॅं कि उलझते रहे अल्फ़ाज़ मेरे।।
___चन्द्र
लोग करते हैं बयाॅं और भी बेहतर हम से
हम भी कहते तो अलग होते कुछ अंदाज़ मेरे।।
___चन्द्र

Friday, February 16, 2024

उसको इमदाद ये क्या दी हमने

2122-1122-22/112
उसको इमदाद ये क्या दी हमने
और मुश्किल ही बढ़ा दी हमने।।1

झड़ सवालों की लगा दी हमने
ख़ुद मुसीबत को सदा दी हमने ।।2

वो कहानी जो सुनी थी आधी 
वो ही आधी सी सुना दी हमने ।।3

जितना पी और बढ़ी तिश्ना-लबी
कू-ए-साक़ी यूँ भुला दी हमने ।।4

ख़त्म करने को वो बात आए थे
और फिर बात बढ़ा दी हमने।।5

हमने फिर की वो जवानी की ख़ता
बुझते शोलों को हवा दी हमने।।6

यूॅं ही बर्बाद मिलाकर कर दी
नात्सी ख़ाक़ में खादी हमने।।7

तू भी अपना न हुआ 'चन्द्र' यहां
देर कहने में लगा दी हमने ।।8
___चन्द्र