2122-1122-22/112
उसको इमदाद ये क्या दी हमने
और मुश्किल ही बढ़ा दी हमने।।1
झड़ सवालों की लगा दी हमने
ख़ुद मुसीबत को सदा दी हमने ।।2
वो कहानी जो सुनी थी आधी
वो ही आधी सी सुना दी हमने ।।3
जितना पी और बढ़ी तिश्ना-लबी
कू-ए-साक़ी यूँ भुला दी हमने ।।4
ख़त्म करने को वो बात आए थे
और फिर बात बढ़ा दी हमने।।5
हमने फिर की वो जवानी की ख़ता
बुझते शोलों को हवा दी हमने।।6
यूॅं ही बर्बाद मिलाकर कर दी
नात्सी ख़ाक़ में खादी हमने।।7
तू भी अपना न हुआ 'चन्द्र' यहां
देर कहने में लगा दी हमने ।।8
___चन्द्र
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