POEMS

Wednesday, February 28, 2024

Chandr's Gazals

यूॅं तो कहने को था कुछ और भी उम्द: तुझ पर
पर हुआ यूॅं कि उलझते रहे अल्फ़ाज़ मेरे।।
___चन्द्र
लोग करते हैं बयाॅं और भी बेहतर हम से
हम भी कहते तो अलग होते कुछ अंदाज़ मेरे।।
___चन्द्र

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