POEMS

Wednesday, September 16, 2020

ग़ज़ल: पत्थर पे रख सिर सो लिये

पत्थर पे रख सिर सो लिये
हाथों में ढक मुँह  रो लिये ।

रख ख्वाब गिरवी सोये यूँ 
आँखों में काँटे बो लिये ।

मेरा बने थी चाह पर
गैरों की सफ़ में हो लिये।

हों दूर साये से तेरे
खुद भीड़ में हम खो लिये ।

जो है ख़फा ,तस्कीन है
बिखरे सुकूँ थे, पो लिये ।

यारी हुई कुछ इस तरह
अब 'चन्द्र' यादों को लिये ।

महेश चन्द्र रस्तोगी 'चन्द्र '
16/09/2020

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